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पर्व विशेष · परंपरा और पूजा मार्गदर्शिका

विषु

विषु केरल में विषुक्कणि और पारिवारिक शुभकामनाओं की परंपरा से जुड़ा पर्व है।

पारंपरिक तिथि / आधार
मलयालम मेष/मेडम सौर संक्रमण का समय
उपासना और उत्सव
विषुक्कणि, कैनीट्टम और शुभ दर्शन

विषु की तिथि और पूजा-समय

मलयालम सौर कैलेंडर की मान्य तारीख देखें।

पर्व की तिथि, पूजा की अवधि और व्रत के पारण का समय अलग हो सकते हैं। तारीख देखते समय वर्ष, शहर और अपनी पारिवारिक परंपरा साथ में देखें।

स्थानीय पंचांग देखें

नीचे के लिंक संबंधित महीनों का पंचांग खोलते हैं। ये पूजा-मुहूर्त की घोषणा नहीं हैं; इस लेख में वर्ष और शहर के लिए अलग से सत्यापित मुहूर्त प्रकाशित नहीं किया गया है।

विषु का महत्व

विषु में विषुक्कणि के शुभ दर्शन की परंपरा प्रमुख है। परिवार फल, अन्न, दीप और अपने पूजनीय प्रतीक सजाकर दिन की शुरुआत मंगलभाव से करता है। बड़ों से मिलने वाला कैनीट्टम भी परिचित रीति है।

यह मेष सौर संक्रमण के समय का केरल का पर्व है। विषु को मलयालम कैलेंडर के चिंगम मास वाले वर्षारंभ के साथ भ्रमित नहीं करना चाहिए।

पूजा की सामग्री और तैयारी

  • विषुक्कणि के लिए फल, अन्न और परिवार की वस्तुएँ
  • दीप, दर्पण और फूल जहाँ परंपरा हो
  • पूजनीय चित्र या कृष्ण-स्वरूप
  • पारिवारिक भोजन की तैयारी

पूजा और उत्सव का क्रम

परिवार अपनी रीति से विषुक्कणि सजाते हैं और प्रातः उसके दर्शन करते हैं। भोजन और बड़ों के आशीर्वाद का भी महत्व है।

  1. स्थानीय मलयालम पंचांग में विषु का दिन देखें।
  2. पूर्व संध्या पर विषुक्कणि अपनी घरेलू रीति से सजाएँ; दीप की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  3. प्रातः दर्शन और प्रार्थना करें। मंदिर जाना हो तो उसका कार्यक्रम देखें।
  4. कैनीट्टम, भोजन और शुभकामनाएँ साझा करें। महंगी सजावट के बजाय परिवार की परंपरा को महत्व दें।

क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ

केरल और मलयाली परिवारों में कणि की वस्तुएँ अलग हो सकती हैं। पुथांडु और अन्य सौर नववर्ष निकट समय में आते हैं, पर उनकी विधियाँ अलग हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विषु ही मलयालम नववर्ष है?

परंपरागत मलयालम वर्षारंभ चिंगम में है। विषु मेष संक्रमण से जुड़ा अलग पर्व है।

विषुक्कणि में हर वस्तु अनिवार्य है?

सज्जा पारिवारिक रीति से बदलती है; स्थानीय उपलब्धता के अनुसार तैयारी करें।

परंपरा-संदर्भ: Drik Panchang पर विषु। ऊपर दिया पूजा-परिचय सामान्य मार्गदर्शन है; विशिष्ट अनुष्ठान अपनी परंपरा के अनुसार करें।