KundliLive पर्व संग्रह
नवदुर्गा के नौ स्वरूप
नवरात्रि की उपासना में नवदुर्गा के नौ नामों का क्रम प्रचलित है। तिथियों के घटने-बढ़ने पर पूजा-दिन स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा से देखें।
जानकारी और परंपरा
शैलपुत्री
पहला स्वरूप; नवरात्रि के आरंभ में स्मरण।
ब्रह्मचारिणी
दूसरा स्वरूप; तपस्या और साधना से संबद्ध।
चंद्रघंटा
तीसरा स्वरूप; मस्तक के चंद्र-चिह्न से नाम जुड़ा है।
कूष्मांडा
चौथा स्वरूप; सृष्टि की पौराणिक कल्पना से संबद्ध।
स्कंदमाता
पाँचवाँ स्वरूप; स्कंद की माता का रूप।
कात्यायनी
छठा स्वरूप; ऋषि कात्यायन से जुड़ा नाम।
कालरात्रि
सातवाँ स्वरूप; देवी का उग्र रक्षक रूप।
महागौरी
आठवाँ स्वरूप; उज्ज्वल गौर वर्ण का वर्णन।
सिद्धिदात्री
नौवाँ स्वरूप; सिद्धियों की दात्री की मान्यता।
इस संग्रह को समझें
नौ स्वरूप और पूजा का क्रम
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नौ स्वरूपों का स्मरण नवरात्रि में प्रचलित है। यह क्रम समझने में सहायक है; वास्तविक तिथि घटने या बढ़ने पर किसी दिन की पूजा का निर्णय स्थानीय पंचांग से होता है। केवल कैलेंडर के नौ खानों से तिथि का अनुमान न लगाएँ।
स्थापना और समापन की तैयारी
कलश स्थापना, दैनिक पाठ, अष्टमी अथवा नवमी की पूजा और कन्या-पूजन के लिए परिवार की पद्धति पहले स्पष्ट करें। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के लेख में सामग्री तथा क्रम दिया गया है; दोनों उत्सवों की तारीखें अलग होती हैं।