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▣ आज का पंचांग

KundliLive पर्व संग्रह

गुरु और संत परंपरा

भारतीय संत परंपराओं में भक्ति, सेवा, साधना और ज्ञान के अलग मार्ग मिलते हैं। जयंती की तारीख और संस्था के उत्सव का कार्यक्रम अलग हो सकते हैं।

जानकारी और परंपरा

वेदव्यास

महाभारत और पुराण-परंपरा से जुड़ा नाम; गुरु पूर्णिमा को व्यास-पूजा भी होती है।

आदि शंकराचार्य

अद्वैत वेदांत और मठ-परंपरा के प्रमुख आचार्य।

रामानुजाचार्य

विशिष्टाद्वैत और श्रीवैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य।

कबीर

निर्गुण भक्ति और सामाजिक विचारों की संत-वाणी के लिए प्रसिद्ध।

तुलसीदास

रामचरितमानस और राम-भक्ति साहित्य से जुड़ा नाम।

मीराबाई

कृष्ण-भक्ति की पद-परंपरा के लिए प्रसिद्ध।

गुरु नानक

सिख परंपरा के प्रथम गुरु; सेवा और नाम-स्मरण की शिक्षा से जुड़े।

तुकाराम

मराठी अभंग और वारकरी भक्ति-परंपरा के प्रमुख संत।

इस संग्रह को समझें

जीवन-परिचय और स्मरण

संतों की शिक्षाएँ उनकी भाषा, रचनाओं और समुदाय की परंपरा के साथ समझें। भक्ति, सेवा और साधना के रूप अलग मिलते हैं। केवल जन्मोत्सव का नाम पढ़ने के बजाय उनकी प्रमाणित रचनाओं तथा जीवन-संदर्भ का अध्ययन उपयोगी है।

गुरु पूर्णिमा और व्यक्तिगत जयंती

गुरु पूर्णिमा व्यापक गुरु-स्मरण का अवसर है; किसी संत की जयंती उसकी अलग परंपरा का उत्सव है। दोनों की तारीख समान मानकर आयोजन न तय करें। परिवार या संस्था के कार्यक्रम में पाठ, सेवा और सामूहिक स्मरण की योजना बनाई जा सकती है।