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फ्री ऑनलाइन जन्म कुंडली हिंदी में बनाएं

अपनी Free Online Janam Kundli in Hindi बनाएं। जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान दर्ज करके लग्न, राशि, नक्षत्र, ग्रह स्थिति, 12 भाव, वर्ग कुंडलियां, दशा-अंतर्दशा, योग-दोष और विस्तृत कुंडली फलादेश देखें। बिना किसी अलग Hindi Kundli Software को डाउनलोड किए अपनी जन्म कुंडली ऑनलाइन तैयार करें।

जन्म विवरण भरकर अपनी Janam Kundli बनाएं

सही परिणाम के लिए जन्म समय और स्थान यथासंभव सटीक रखें।
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स्थान चुनने पर अक्षांश और देशांतर स्वतः निर्धारित होंगे।

कुंडली, जन्म कुंडली या जन्मपत्रिका क्या है?

कुंडली, जन्म कुंडली और जन्मपत्रिका सामान्यतः उसी ज्योतिषीय Birth Chart के लिए प्रयोग होने वाले नाम हैं, जिसे व्यक्ति की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर तैयार किया जाता है।

जन्म के समय आकाश में सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रह एक निश्चित खगोलीय स्थिति में होते हैं। वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के माध्यम से इन ग्रहों को राशियों और भावों में दर्शाया जाता है और उसी से जन्म कुंडली तैयार होती है।

एक विस्तृत जन्म कुंडली में सामान्यतः इन ज्योतिषीय तत्वों का अध्ययन किया जाता है:

  • लग्न
  • चंद्र राशि
  • जन्म नक्षत्र
  • 12 भाव
  • भावेश
  • ग्रहों की राशि और भाव स्थिति
  • ग्रह दृष्टि और युति
  • वर्ग कुंडलियां
  • महादशा और अंतर्दशा
  • प्रमुख योग और दोष
  • विभिन्न जीवन क्षेत्रों का फलादेश

इसी कारण केवल अपनी राशि जान लेना और पूरी जन्म कुंडली का अध्ययन करना दो अलग बातें हैं।

ऑनलाइन जन्म कुंडली कैसे बनती है?

Online Kundli in Hindi बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन जानकारियां आवश्यक होती हैं: जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान।

इन विवरणों के आधार पर जन्म के समय ग्रहों की खगोलीय स्थिति की गणना की जाती है। इसके बाद यह निर्धारित किया जाता है कि जन्म के समय कौन-सा लग्न उदित था, कौन-सा ग्रह किस राशि और भाव में स्थित था तथा जन्म नक्षत्र कौन-सा था।

इन्हीं गणनाओं के आधार पर आपका Kundli Chart और उससे जुड़ी अन्य ज्योतिषीय जानकारियां तैयार होती हैं।

जन्म स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अलग-अलग स्थानों की भौगोलिक स्थिति अलग होती है। इसी तरह जन्म समय में अंतर होने से लग्न और भावों की स्थिति बदल सकती है। इसलिए सही जन्म कुंडली के लिए केवल जन्म तारीख ही नहीं, बल्कि सही जन्म समय और स्थान भी महत्वपूर्ण हैं।

अपनी Online Janam Kundli कैसे बनाएं?

KundliLive पर अपनी Janam Kundli by Date of Birth and Time बनाना आसान है।

  1. अपना नाम और आवश्यक विवरण भरें।
  2. अपनी सही जन्म तिथि दर्ज करें।
  3. जन्म का सही समय भरें।
  4. जन्म स्थान चुनें।
  5. विवरण की पुष्टि करके कुंडली बनाएं पर क्लिक करें।
  6. अपनी जन्म कुंडली और उपलब्ध विस्तृत ज्योतिषीय जानकारी देखें।

इस प्रकार बिना किसी अलग Hindi Kundli Software को डाउनलोड किए आप सीधे ऑनलाइन अपनी Janam Kundli in Hindi तैयार कर सकते हैं।

Free Online Kundli क्यों बनाएं?

पहले जन्म कुंडली तैयार करने के लिए बहुत-सी ज्योतिषीय गणनाएं हाथ से करनी पड़ती थीं। आज Online Kundli Generator in Hindi इन्हीं गणनाओं को डिजिटल रूप में तेजी और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत कर सकता है।

ऑनलाइन कुंडली का अर्थ वैदिक ज्योतिष के नियमों को बदलना नहीं है। इसका उद्देश्य ज्योतिषीय गणनाओं को डिजिटल माध्यम से आसान बनाना है।

KundliLive पर जन्म कुंडली बनाकर आप अपने जन्म से संबंधित कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय जानकारियां एक ही रिपोर्ट में देख सकते हैं।

जन्म कुंडली में लग्न, राशि और नक्षत्र क्या बताते हैं?

लग्न

जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर जो राशि उदित होती है, उसे लग्न कहा जाता है। जन्म कुंडली में लग्न का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसी से भावों का क्रम निर्धारित होता है।

लग्न और लग्नेश के आधार पर व्यक्तित्व, शारीरिक प्रकृति और जीवन की मूल दिशा से जुड़े कई ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन किया जाता है।

राशि

जन्म कुंडली में प्रत्येक ग्रह किसी न किसी राशि में स्थित होता है। ग्रह किस राशि में है, इससे उस ग्रह की अभिव्यक्ति और ज्योतिषीय प्रभाव को समझने में सहायता मिलती है।

भारतीय ज्योतिष में सामान्य बोलचाल में किसी व्यक्ति की “राशि” से अक्सर उसकी चंद्र राशि का अर्थ लिया जाता है।

नक्षत्र

वैदिक ज्योतिष में राशि चक्र को 27 प्रमुख नक्षत्रों में विभाजित किया जाता है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसे व्यक्ति का जन्म नक्षत्र कहा जाता है।

जन्म नक्षत्र का उपयोग स्वभाव के अध्ययन के साथ-साथ विंशोत्तरी दशा की गणना में भी महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है।

जन्म कुंडली के 12 भाव

वैदिक जन्म कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं। प्रत्येक भाव जीवन के किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।

उदाहरण के रूप में भावों से व्यक्तित्व, परिवार, धन, शिक्षा, संतान, विवाह, करियर, भाग्य, लाभ और जीवन के अन्य क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है।

लेकिन किसी भाव का फल केवल उस भाव में बैठे ग्रह को देखकर तय नहीं किया जाता। विस्तृत Kundli Analysis में उस भाव के स्वामी यानी भावेश, संबंधित ग्रहों, दृष्टियों, युतियों और अन्य ज्योतिषीय स्थितियों का भी अध्ययन किया जाता है।

यही कारण है कि एक संपूर्ण जन्म कुंडली का विश्लेषण किसी एक ग्रह या एक योग से कहीं अधिक विस्तृत होता है।

कुंडली में भाव, राशि और ग्रहों की भूमिका

जन्म कुंडली को समझने के लिए ग्रह, राशि और भाव तीनों का संयुक्त अध्ययन महत्वपूर्ण है।

ग्रह ज्योतिषीय कारक और विभिन्न प्रकार की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। राशि यह समझने में सहायता करती है कि कोई ग्रह अपनी प्रकृति को किस प्रकार व्यक्त कर रहा है। भाव यह संकेत देता है कि ग्रह का प्रभाव जीवन के किस क्षेत्र से जुड़ रहा है।

लेकिन किसी ग्रह का परिणाम केवल यह देखकर तय नहीं किया जा सकता कि वह किस भाव में स्थित है। उसकी राशि, भावेशत्व, दृष्टि, युति, बल और अन्य ग्रहों से संबंध भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसीलिए KundliLive में विस्तृत जन्म कुंडली को केवल ग्रहों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि अलग-अलग ज्योतिषीय कारकों के संयुक्त स्वरूप में समझना अधिक उपयोगी है।

वर्ग कुंडलियां क्या होती हैं?

वैदिक ज्योतिष में मुख्य जन्म कुंडली के साथ कई वर्ग कुंडलियों या Divisional Charts का भी उपयोग किया जाता है।

मुख्य जन्म कुंडली को D1 कहा जाता है। इसके अलावा अलग-अलग जीवन क्षेत्रों का अधिक सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए आवश्यकतानुसार अन्य वर्ग कुंडलियों को देखा जाता है।

उदाहरण के लिए:

  • D9 नवांश विवाह, धर्म और ग्रहों की गहरी स्थिति के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • D10 दशमांश करियर और कार्यक्षेत्र के विश्लेषण में उपयोगी माना जाता है।

केवल किसी एक वर्ग कुंडली को अलग से देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय मुख्य जन्म कुंडली और संबंधित वर्ग कुंडली के संकेतों को साथ में समझना अधिक उचित होता है।

महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा

जन्म कुंडली यह बताती है कि जन्म के समय ग्रहों की स्थिति कैसी थी, जबकि दशा प्रणाली जीवन में अलग-अलग ग्रहों के सक्रिय समय को समझने में सहायता करती है।

वैदिक ज्योतिष में विंशोत्तरी दशा प्रणाली का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा जैसे स्तर होते हैं।

दशा विश्लेषण के माध्यम से यह देखा जाता है कि जन्म कुंडली में मौजूद कौन-से ग्रह और उनसे संबंधित भाव किसी विशेष समय में अधिक सक्रिय हो सकते हैं।

इसलिए किसी घटना का समय देखने में केवल जन्म कुंडली के योगों को देखना पर्याप्त नहीं होता; संबंधित दशा का अध्ययन भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

योग और दोष क्या होते हैं?

जन्म कुंडली में ग्रहों, भावों और भावेशों की विशेष स्थितियों और संबंधों से विभिन्न योग और दोष बन सकते हैं।

कुछ योगों को वैदिक ज्योतिष में शुभ प्रभावों से जोड़ा जाता है, जबकि कुछ ग्रह स्थितियां चुनौतियों की ओर संकेत कर सकती हैं।

लेकिन किसी एक योग या दोष का नाम दिखाई देना ही अंतिम फलादेश नहीं होता। उस योग की वास्तविक प्रभावशीलता समझने के लिए उससे संबंधित ग्रहों की स्थिति, बल, भाव, दृष्टि, युति और अन्य ज्योतिषीय कारकों का भी अध्ययन करना आवश्यक होता है।

इसीलिए जन्म कुंडली में बनने वाले योग-दोषों को पूरी कुंडली के संदर्भ में देखना अधिक उपयुक्त होता है।

मांगलिक दोष क्या है?

मांगलिक दोष, जिसे मंगल दोष भी कहा जाता है, जन्म कुंडली में मंगल की कुछ विशेष भाव स्थितियों से संबंधित पारंपरिक ज्योतिषीय विचार है।

लेकिन केवल मंगल को किसी एक भाव में देखकर गंभीर वैवाहिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

विस्तृत Manglik Dosha Analysis में मंगल की राशि और भाव स्थिति के साथ उसकी दृष्टि, युति, संबंधित भावों की स्थिति, अन्य ग्रहों का प्रभाव और संभावित दोष-भंग स्थितियों को भी देखा जाता है।

इसलिए मांगलिक दोष का अध्ययन पूरी जन्म कुंडली के संदर्भ में करना अधिक उचित है।

कुंडली विश्लेषण कैसे किया जाता है?

एक विस्तृत जन्म कुंडली विश्लेषण को मुख्य रूप से चार स्तरों पर समझा जा सकता है।

1. मूल जन्म कुंडली

सबसे पहले लग्न, 12 भाव, भावेश, ग्रहों की राशि और भाव स्थिति, दृष्टि तथा ग्रहों के आपसी संबंध देखे जाते हैं।

2. वर्ग कुंडलियों से पुष्टि

मुख्य जन्म कुंडली में मिले संकेतों को संबंधित वर्ग कुंडलियों के माध्यम से और गहराई से समझा जाता है।

3. दशा और समय

महादशा, अंतर्दशा और अन्य समय-संबंधी ज्योतिषीय संकेतों से यह देखा जाता है कि कुंडली में मौजूद कौन-से परिणाम किस समय अधिक सक्रिय हो सकते हैं।

4. संयुक्त फलादेश

अंत में भाव, भावेश, ग्रह, वर्ग कुंडली, योग-दोष और दशा सहित उपलब्ध प्रमुख ज्योतिषीय संकेतों को एक साथ देखकर समग्र कुंडली फलादेश तैयार किया जाता है।

इसलिए किसी एक ग्रह, राशि या योग के आधार पर पूरी कुंडली का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

जन्म कुंडली से क्या-क्या देखा जा सकता है?

एक विस्तृत Hindi Kundli के माध्यम से वैदिक ज्योतिष में जीवन के कई क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • स्वभाव और व्यक्तित्व
  • शिक्षा
  • नौकरी और करियर
  • व्यवसाय
  • धन और आय
  • बचत और आर्थिक स्थिति
  • विवाह और रिश्ते
  • संतान
  • पारिवारिक जीवन
  • संपत्ति और वाहन
  • भाग्य
  • जीवन के महत्वपूर्ण समय
  • ग्रहों की दशा
  • योग और दोष

हर विषय के लिए संबंधित भाव, भावेश, ग्रह और आवश्यक वर्ग कुंडलियों का अध्ययन अलग-अलग तरीके से किया जाता है।

जन्म कुंडली के प्रमुख लाभ

अपने व्यक्तित्व को समझना

लग्न, चंद्रमा, ग्रहों और भावों के आधार पर व्यक्ति की प्रकृति, सोच और व्यवहार से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन किया जा सकता है।

शिक्षा और करियर का अध्ययन

शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय और करियर से जुड़े भावों तथा ग्रहों का अध्ययन करके इन क्षेत्रों से संबंधित ज्योतिषीय संभावनाओं को समझा जा सकता है।

विवाह और रिश्ते

विवाह से संबंधित भावों, भावेशों और ग्रहों के माध्यम से वैवाहिक जीवन तथा रिश्तों के ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन किया जाता है।

धन और आर्थिक जीवन

धन, आय, बचत और लाभ से जुड़े भावों तथा ग्रहों से आर्थिक जीवन के संकेतों का अध्ययन किया जा सकता है।

दशाओं को समझना

महादशा और अंतर्दशा के माध्यम से यह समझने में सहायता मिलती है कि किसी समय कौन-से ग्रह और जीवन क्षेत्र अधिक सक्रिय हो सकते हैं।

जन्म कुंडली और कुंडली मिलान में क्या अंतर है?

जन्म कुंडली किसी एक व्यक्ति के जन्म विवरण से तैयार होती है और उसके जीवन से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों के अध्ययन के लिए उपयोग की जाती है।

वहीं Kundli Matching या कुंडली मिलान में दो व्यक्तियों की जन्म कुंडलियों की तुलना की जाती है।

विवाह के पारंपरिक अष्टकूट मिलान में अधिकतम 36 गुणों का अध्ययन किया जाता है। लेकिन विस्तृत विवाह विश्लेषण केवल गुणों की संख्या तक सीमित नहीं रहता; दोनों जन्म कुंडलियों में विवाह से संबंधित भावों, ग्रहों और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों को भी देखा जा सकता है।

प्रश्न कुंडली और जन्म कुंडली में क्या अंतर है?

जन्म कुंडली व्यक्ति के वास्तविक जन्म समय और स्थान पर आधारित होती है। इसके विपरीत प्रश्न कुंडली किसी विशेष प्रश्न को पूछे जाने के समय और स्थान के आधार पर बनाई जाती है। इसलिए दोनों अलग ज्योतिषीय पद्धतियां हैं।

यदि जन्म का सही समय उपलब्ध है तो व्यक्ति की मूल जीवन-कुंडली के अध्ययन के लिए जन्म कुंडली का महत्व अलग होता है, जबकि प्रश्न कुंडली किसी विशेष प्रश्न के संदर्भ में प्रयोग की जाती है।

अपनी कुंडली से सवाल पूछें

जन्म कुंडली तैयार होने के बाद KundliLive में अपनी कुंडली से जुड़े सवाल पूछें। उत्तर आपकी जन्म कुंडली में उपलब्ध ग्रह, भाव, दशा और अन्य ज्योतिषीय जानकारी के आधार पर तैयार किए जाते हैं।

अपनी कुंडली से पूछें

KundliLive का उद्देश्य

KundliLive का उद्देश्य वैदिक ज्योतिष की गणनाओं और जन्म कुंडली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को सामान्य उपयोगकर्ता के लिए सरल और व्यवस्थित रूप में उपलब्ध कराना है।

हम चाहते हैं कि उपयोगकर्ता केवल अपनी Online Janam Kundli देखकर न रुकें, बल्कि यह भी समझ सकें कि उनकी कुंडली में मौजूद लग्न, ग्रह, राशि, नक्षत्र, भाव, वर्ग कुंडलियां और दशाएं क्या संकेत देती हैं।

डिजिटल माध्यम से वैदिक ज्योतिष की जटिल गणनाओं को सरल रूप में प्रस्तुत करना और उपयोगकर्ता को अपनी जन्म कुंडली को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करना KundliLive का प्रमुख उद्देश्य है।

FAQ

Free Online Kundli से जुड़े सामान्य प्रश्न

जन्म विवरण, चार्ट और रिपोर्ट को समझने के संक्षिप्त उत्तर।

फ्री ऑनलाइन जन्म कुंडली कैसे बनाएं?

अपनी जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान दर्ज करके KundliLive पर अपनी Free Online Kundli in Hindi तैयार की जा सकती है।

जन्म कुंडली बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?

सही जन्म कुंडली के लिए मुख्य रूप से जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान की आवश्यकता होती है।

क्या केवल जन्म तारीख से कुंडली बन सकती है?

जन्म तारीख से कुछ सीमित ज्योतिषीय जानकारी निकाली जा सकती है, लेकिन विस्तृत वैदिक जन्म कुंडली के लिए सही जन्म समय और जन्म स्थान भी महत्वपूर्ण हैं।

जन्म समय सही होना क्यों जरूरी है?

जन्म समय से लग्न और भावों की स्थिति निर्धारित होती है। समय में अंतर होने से लग्न या भावों की गणना प्रभावित हो सकती है।

क्या मोबाइल पर Online Kundli बनाई जा सकती है?

हाँ। KundliLive का उपयोग मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर के माध्यम से करके अपनी जन्म कुंडली ऑनलाइन देखी जा सकती है।

Janam Kundli और Birth Chart क्या एक ही हैं?

Birth Chart एक व्यापक English term है। वैदिक ज्योतिष के संदर्भ में जन्म विवरण से तैयार किए गए ज्योतिषीय चार्ट को जन्म कुंडली या Janam Kundli कहा जाता है।

D1 और D9 कुंडली में क्या अंतर है?

D1 मुख्य जन्म कुंडली है, जबकि D9 को नवांश कुंडली कहा जाता है। नवांश का उपयोग मुख्य कुंडली के कई महत्वपूर्ण संकेतों को अधिक गहराई से समझने में किया जाता है।

महादशा और अंतर्दशा क्या होती हैं?

वैदिक ज्योतिष में दशा प्रणाली ग्रहों के सक्रिय समय का अध्ययन करने के लिए उपयोग की जाती है। महादशा मुख्य अवधि होती है और उसके अंदर चलने वाली छोटी अवधि को अंतर्दशा कहा जाता है।

उदाहरण रिपोर्ट यह केवल preview है—बाईं ओर अपना जन्म विवरण भरकर अपनी कुंडली बनाएं।
आपकी कुंडली रिपोर्ट
उदाहरण जन्म कुंडली
पुरुष · 1990-01-01 · 10:30 · Jaipur, Rajasthan, India
अक्षांश 26.9124° · देशांतर 75.7873° · समय क्षेत्र Asia/Kolkata
✓ KundliLive Astro Engine से गणना
जन्म स्थान एवं स्थान निर्देशांक
Jaipur, Rajasthan, India
अक्षांश 26.9124°
देशांतर 75.7873°
समय क्षेत्र Asia/Kolkata
लग्न
कुंभ
चंद्र राशि
कुंभ
नक्षत्र
धनिष्ठा
पद 4
सूर्य राशि
धनु
वर्तमान दशा
शनि / शनि / मंगल
कुंडली सार

सारांश

KUNDLILIVE.COM
श्री गणेशाय नमः

कुंडली विवरण

कम्प्यूटर-जनित वैदिक ज्योतिष रिपोर्ट

प्रिंट विकल्प
उदाहरण अपनी व्यक्तिगत रिपोर्ट के लिए बाईं ओर खाली form में जन्म विवरण भरें।

व्यक्ति एवं जन्म विवरण

नामउदाहरण जन्म कुंडली
लिंगपुरुष
जन्म तिथि1990-01-01
जन्म समय10:30
वारसोमवार
जन्म स्थानJaipur, Rajasthan, India
समय क्षेत्रAsia/Kolkata
अक्षांश26.9124°
देशांतर75.7873°
वर्तमान दशाशनि / शनि / मंगल

दशा सार

जन्म समय शेष दशामंगल — 0 वर्ष 6 माह 18 दिन
वर्तमान महादशाशनि
महादशा आरंभ19 जुलाई 2024
वर्तमान अंतर्दशाशनि
अंतर्दशा आरंभ19 जुलाई 2024
वर्तमान प्रत्यंतरमंगल
प्रत्यंतर आरंभ12 जुलाई 2026
प्रत्यंतर अंत14 सितंबर 2026
अगली दशा आरंभ23 जुलाई 2027

जन्म पंचांग

लग्नकुंभ 10°42′53″
लग्न स्वामीशनि
लग्न नक्षत्र-पदशतभिषा पद 2
चंद्र राशिकुंभ 5°37′33″
राशि स्वामीशनि
नक्षत्र स्वामीमंगल
सूर्य राशिधनु
सूर्य राशि स्वामीगुरु
सूर्य नक्षत्र-पदपूर्वाषाढ़ा पद 2
जन्मांक1
भाग्यांक3
तिथिशुक्ल पंचमी
पक्षशुक्ल पक्ष
नक्षत्र-पदधनिष्ठा पद 4
योगसिद्धि
करणबव

अवकहड़ा चक्र

जन्म नामाक्षरगे
वर्णशूद्र
वश्यमनुष्य
योनिसिंह
गणराक्षस
नाड़ीमध्य
राशि पायासोना
नक्षत्र पायातांबा

भारतीय कैलेंडर एवं सूर्योदय एवं सूर्यास्त

विक्रम संवत2046
शक संवत1911
गुजराती संवत2046
अमांत मासपौष
पूर्णिमांत मासपौष
सौर मासमकर
अधिक मासनहीं
सूर्योदय07:15:56
सूर्यास्त17:44:45
लाहिरी अयनांश23.717406°
कुंडली चार्ट

कुंडली चार्ट

D1 के साथ D9, D4, D7, D10, D12, D24 और D30 वर्ग कुंडलियाँ एक ही सत्यापित जन्म-ग्रह स्थिति से बनाई गई हैं।
मुख्य जन्म कुंडली (D1)
उत्तर भारतीय शैली
मूल जन्म चार्ट
लग्न भाव 1
कुंभ
चंद्र 5.63°
भाव 2
मीन
भाव 3
मेष
भाव 4
वृषभ
भाव 5
मिथुन
गुरु 11.47°
भाव 6
कर्क
केतु 24.73°
भाव 7
सिंह
भाव 8
कन्या
भाव 9
तुला
भाव 10
वृश्चिक
मंगल 16.07°
भाव 11
धनु
सूर्य 16.80° शनि 21.90°
भाव 12
मकर
बुध 2.03° शुक्र 12.54° राहु 24.73°
नवांश कुंडली (D9)
उत्तर भारतीय शैली
विवाह, धर्म व पुष्टि
नवांश लग्न भाव 1
मकर
बुध 18.26° गुरु 13.21°
भाव 2
कुंभ
केतु 12.57°
भाव 3
मीन
भाव 4
मेष
शुक्र 22.82°
भाव 5
वृषभ
भाव 6
मिथुन
भाव 7
कर्क
भाव 8
सिंह
राहु 12.57°
भाव 9
कन्या
सूर्य 1.17°
भाव 10
तुला
शनि 17.12°
भाव 11
वृश्चिक
चंद्र 20.63° मंगल 24.67°
भाव 12
धनु
चतुर्थांश कुंडली (D4)
उत्तर भारतीय शैली
घर व संपत्ति
सप्तांश कुंडली (D7)
उत्तर भारतीय शैली
संतान
दशमांश कुंडली (D10)
उत्तर भारतीय शैली
करियर व पेशा
द्वादशांश कुंडली (D12)
उत्तर भारतीय शैली
माता-पिता व वंश
चतुर्विंशांश कुंडली (D24)
उत्तर भारतीय शैली
शिक्षा व विद्या
त्रिंशांश कुंडली (D30)
उत्तर भारतीय शैली
चुनौतियाँ व स्वास्थ्य संकेत
ग्रहों की स्थिति

ग्रह स्थिति सारणी

यह सारणी बताती है कि जन्म के समय लग्न और प्रत्येक ग्रह किस राशि व नक्षत्र में था।
ग्रह राशि अंश राशि स्वामी नक्षत्र चरण नक्षत्र स्वामी स्थिति
लग्न कुंभ 10°42′53″ शनि शतभिषा 2 राहु
सूर्य धनु 16°47′46″ बृहस्पति पूर्वाषाढ़ा 2 शुक्र
चंद्र कुंभ 5°37′33″ शनि धनिष्ठा 4 मंगल
मंगल वृश्चिक 16°04′28″ मंगल अनुराधा 4 शनि
बुध मकर 2°01′43″ शनि उत्तराषाढ़ा 2 सूर्य
बृहस्पति मिथुन 11°28′03″ बुध आर्द्रा 2 राहु
शुक्र मकर 12°32′07″ शनि श्रवण 1 चंद्र
शनि धनु 21°54′09″ बृहस्पति पूर्वाषाढ़ा 3 शुक्र
राहु मकर 24°43′47″ शनि धनिष्ठा 1 मंगल
केतु कर्क 24°43′47″ चंद्र आश्लेषा 3 बुध
योग एवं दोष

योग एवं दोष

त्वरित योग-दोष जाँच नाम पर क्लिक करें या “+ विवरण” खोलें। पूरी जानकारी अलग विंडो में खुलेगी।
योग: 3 दोष जाँच: 8

योग परिणाम

कुंडली में बने प्रमुख योग
सरल योग योग मौजूद

सरल योग

फल की प्रकृतिसामान्य

सरल अर्थ

कठिन भावों के विशेष संबंध से बनने वाला योग, जो संघर्ष या बाधाओं के बाद सुधार और सफलता की क्षमता देता है।

आपकी कुंडली में

आपकी कुंडली में इस योग से जुड़े प्रमुख ग्रह बुध हैं। इसका फल कितना मजबूत होगा, यह ग्रहों की शक्ति और चल रही दशा पर निर्भर करेगा।

यह योग क्यों बन रहा है?

  • 8वें दुष्थान भाव का स्वामी बुध 12वें दुष्थान भाव में स्थित है; इसी दुष्थान-से-दुष्थान संबंध से यह योग बनता है।

संभावित फल और प्रभाव

दुष्थान भावों के स्वामियों की स्थिति कठिन परिस्थितियों, बाधाओं या हानि से उलटकर लाभ, सुधार या नियंत्रण प्राप्त करने की क्षमता का संकेत देती है।

संबंधित ग्रह

बुध

योग कितना समर्थ है?

योग बना है, पर D1/D9 से अतिरिक्त मजबूत समर्थन अभी नहीं मिला।

वर्तमान दशा में सक्रियता

वर्तमान महादशा-अंतर्दशा में योग के सहभागी ग्रहों की प्रत्यक्ष सक्रियता नहीं मिली; योग जन्मकुंडली में मौजूद है, लेकिन timing support अभी direct नहीं है।

विस्तृत और व्यावहारिक उपाय

  1. श्रद्धानुसार इष्टदेव की नियमित पूजा, ध्यान या नवग्रह प्रार्थना करें।
  2. बिना भय या आर्थिक दबाव के अपनी क्षमता के अनुसार दान अथवा सेवा करें।
  3. योग से जुड़े जीवन-क्षेत्र में अनुशासित निर्णय और निरंतर प्रयास रखें।
  4. योग का फल कर्म और सही समय से विकसित होता है; संबंधित जीवन-क्षेत्र में नियमित, व्यावहारिक प्रयास रखें।
  5. किसी रत्न, महंगे अनुष्ठान या बड़े दान का निर्णय व्यक्तिगत ग्रहबल की अलग जाँच के बिना न लें।
ये उपाय आस्था और स्वेच्छा पर आधारित हैं; किसी परिणाम की गारंटी नहीं हैं।
केंद्र-त्रिकोण राजयोग योग मौजूद

केंद्र-त्रिकोण राजयोग

फल की प्रकृतिमिश्रित

सरल अर्थ

केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामियों के संबंध से बनने वाला प्रमुख राजयोग। यह अवसर, प्रगति और प्रतिष्ठा में सहयोग दे सकता है।

आपकी कुंडली में

आपकी कुंडली में इस योग से जुड़े प्रमुख ग्रह शुक्र, बुध, सूर्य, शनि हैं। यह 3 अलग ग्रह/भाव संबंधों से बन रहा है, इसलिए समझने में आसानी के लिए इसे एक ही स्थान पर दिखाया गया है। इसका फल कितना मजबूत होगा, यह ग्रहों की शक्ति और चल रही दशा पर निर्भर करेगा।

यह योग क्यों बन रहा है?

  • 4वें केंद्र भाव के स्वामी शुक्र और 5वें त्रिकोण भाव के स्वामी बुध के बीच संबंध बन रहा है।
  • संबंध का आधार: युति.
  • 4वें केंद्र भाव के स्वामी शुक्र और 9वें त्रिकोण भाव के स्वामी शुक्र के बीच संबंध बन रहा है।
  • संबंध का आधार: एक ही ग्रह का दोनों भावों का स्वामी होना.
  • 7वें केंद्र भाव के स्वामी सूर्य और 1वें त्रिकोण भाव के स्वामी शनि के बीच संबंध बन रहा है।

संभावित फल और प्रभाव

केन्द्र और त्रिकोण स्वामियों का संबंध क्षमता, प्रतिष्ठा, नेतृत्व, अवसर और उन्नति के योग को दर्शाता है।

संबंधित ग्रह

शुक्रबुधसूर्यशनि

योग कितना समर्थ है?

योग बना है, लेकिन ग्रहबल मिश्रित है; इसलिए परिणामों की तीव्रता समान नहीं रहेगी।

वर्तमान दशा में सक्रियता

वर्तमान महादशा-अंतर्दशा में योग के सहभागी ग्रहों की प्रत्यक्ष सक्रियता नहीं मिली; योग जन्मकुंडली में मौजूद है, लेकिन timing support अभी direct नहीं है।

विस्तृत और व्यावहारिक उपाय

  1. गुरु, मार्गदर्शक और बड़ों का सम्मान करें तथा काम और सार्वजनिक जिम्मेदारियों में वचन निभाएँ।
  2. इष्टदेव की नियमित पूजा और गुरुवार को सामर्थ्य अनुसार सेवा/दान करें।
  3. मिले अवसरों का नैतिक उपयोग करना राजयोग को टिकाऊ बनाने का सबसे व्यावहारिक उपाय है।
  4. योग का फल कर्म और सही समय से विकसित होता है; संबंधित जीवन-क्षेत्र में नियमित, व्यावहारिक प्रयास रखें।
  5. किसी रत्न, महंगे अनुष्ठान या बड़े दान का निर्णय व्यक्तिगत ग्रहबल की अलग जाँच के बिना न लें।
ये उपाय आस्था और स्वेच्छा पर आधारित हैं; किसी परिणाम की गारंटी नहीं हैं।
धन योग योग मौजूद

धन योग

फल की प्रकृतिसामान्य

सरल अर्थ

धन से जुड़े भावों और ग्रहों के संबंध से बनने वाला योग, जो कमाई और आर्थिक अवसरों में सहयोग दे सकता है।

आपकी कुंडली में

आपकी कुंडली में इस योग से जुड़े प्रमुख ग्रह बृहस्पति, बुध, शुक्र हैं। यह 2 अलग ग्रह/भाव संबंधों से बन रहा है, इसलिए समझने में आसानी के लिए इसे एक ही स्थान पर दिखाया गया है। इसका फल कितना मजबूत होगा, यह ग्रहों की शक्ति और चल रही दशा पर निर्भर करेगा।

यह योग क्यों बन रहा है?

  • 2वें धन-संबंधी भाव के स्वामी गुरु और 11वें भाव के स्वामी गुरु का संबंध बन रहा है।
  • संबंध का आधार: एक ही ग्रह का दोनों भावों का स्वामी होना.
  • 5वें धन-संबंधी भाव के स्वामी बुध और 9वें भाव के स्वामी शुक्र का संबंध बन रहा है।
  • संबंध का आधार: युति.

संभावित फल और प्रभाव

धन-संबंधी भावों के स्वामियों का संबंध आय, संसाधन, संचय और आर्थिक अवसरों की संभावना को बढ़ाने वाला योग बनाता है।

संबंधित ग्रह

बृहस्पतिबुधशुक्र

योग कितना समर्थ है?

योग बना है, पर D1/D9 से अतिरिक्त मजबूत समर्थन अभी नहीं मिला।

वर्तमान दशा में सक्रियता

वर्तमान महादशा-अंतर्दशा में योग के सहभागी ग्रहों की प्रत्यक्ष सक्रियता नहीं मिली; योग जन्मकुंडली में मौजूद है, लेकिन timing support अभी direct नहीं है।

विस्तृत और व्यावहारिक उपाय

  1. श्रद्धानुसार इष्टदेव की नियमित पूजा, ध्यान या नवग्रह प्रार्थना करें।
  2. बिना भय या आर्थिक दबाव के अपनी क्षमता के अनुसार दान अथवा सेवा करें।
  3. योग से जुड़े जीवन-क्षेत्र में अनुशासित निर्णय और निरंतर प्रयास रखें।
  4. योग का फल कर्म और सही समय से विकसित होता है; संबंधित जीवन-क्षेत्र में नियमित, व्यावहारिक प्रयास रखें।
  5. किसी रत्न, महंगे अनुष्ठान या बड़े दान का निर्णय व्यक्तिगत ग्रहबल की अलग जाँच के बिना न लें।
ये उपाय आस्था और स्वेच्छा पर आधारित हैं; किसी परिणाम की गारंटी नहीं हैं।

दोष जाँच परिणाम

हर दोष की वर्तमान स्थिति

सावधानी / दोष मौजूद 2

पितृ दोष संकेत दोष मौजूद

पितृ दोष संकेत

यह क्या है?

पितृ दोष के संकेत सूर्य, नवम भाव और नवम भाव के स्वामी पर पड़ने वाले कुछ विशेष प्रभावों से देखे जाते हैं। यह निश्चित जीवन-घटना की घोषणा नहीं है।

आपकी कुंडली में स्थिति

यह स्थिति चुने गए ज्योतिषीय नियमों के अनुसार बन रही है। फिर भी इसका वास्तविक प्रभाव ग्रहों की शक्ति, भाव और दशा के अनुसार कम-ज्यादा हो सकता है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • सूर्य और शनि एक ही राशि में हैं।
  • Ninth lord Venus conjunct RahuMean

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा, सम्मान और अधूरे पारिवारिक दायित्वों को व्यवस्थित करें।
  2. परिवार की परंपरा के अनुसार अमावस्या/श्राद्ध पक्ष में तर्पण, स्मरण या प्रार्थना कर सकते हैं।
  3. पूर्वजों की स्मृति में भोजन, वस्त्र या शिक्षा-सहायता का दान अपनी क्षमता अनुसार करें।
  4. परिवार में संपत्ति या संबंध का विवाद हो तो संवाद और वैधानिक सलाह लें; अनुष्ठान उसका विकल्प नहीं है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
पापकर्तरी योग दोष मौजूद

पापकर्तरी योग

यह क्या है?

जब किसी भाव या ग्रह के दोनों ओर प्राकृतिक पाप ग्रहों का दबाव हो, तो उसे पापकर्तरी स्थिति कहा जाता है। इसका फल संबंधित भाव और ग्रह की शक्ति पर निर्भर करता है।

आपकी कुंडली में स्थिति

यह स्थिति चुने गए ज्योतिषीय नियमों के अनुसार बन रही है। फिर भी इसका वास्तविक प्रभाव ग्रहों की शक्ति, भाव और दशा के अनुसार कम-ज्यादा हो सकता है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • 11वाँ भाव दोनों ओर से दबाव में है: पिछले भाव में मंगल और अगले भाव में राहु।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. जिस भाव पर दबाव है, उस जीवन-क्षेत्र में जल्दबाजी की बजाय लिखित योजना, सीमा और बैकअप रखें।
  2. संबंधित ग्रहों की दशा में अनुशासन, समय-पालन और विवाद से बचाव पर विशेष ध्यान दें।
  3. श्रद्धानुसार हनुमान/शिव पूजा, सेवा और अन्नदान कर सकते हैं।
  4. रत्न या महंगा अनुष्ठान केवल इस एक योग के आधार पर न करें।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।

सामान्य / दोष नहीं 6

काल सर्प स्थिति दोष नहीं

काल सर्प स्थिति

यह क्या है?

काल सर्प स्थिति में यह देखा जाता है कि मुख्य ग्रह राहु-केतु की धुरी के एक ओर आ रहे हैं या नहीं। यह एक प्रचलित आधुनिक ज्योतिषीय नियम है और इसे डर का कारण नहीं मानना चाहिए।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • राहु 12वें और केतु 6वें भाव में हैं; सातों मुख्य ग्रह राहु-केतु की एक ही धुरी में पूरी तरह नहीं आ रहे।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
मांगलिक दोष दोष नहीं

मांगलिक दोष

यह क्या है?

मांगलिक दोष मंगल की स्थिति देखकर जांचा जाता है। केवल मंगल किसी विशेष भाव में होने से अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता; उसके शमन या रद्द होने के नियम भी साथ में देखे जाते हैं।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • मंगल लग्न से 10वें भाव में है—यह भाव मांगलिक जाँच में दोष बनाने वाले भावों में शामिल नहीं है।
  • मंगल चंद्र से 10वें भाव में है—यह भाव मांगलिक जाँच में दोष बनाने वाले भावों में शामिल नहीं है।
  • मंगल शुक्र से 11वें भाव में है—यह भाव मांगलिक जाँच में दोष बनाने वाले भावों में शामिल नहीं है।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
ग्रहण योग दोष नहीं

ग्रहण योग

यह क्या है?

यहां ग्रहण योग से मतलब सूर्य या चंद्र का राहु/केतु से ज्योतिषीय युति-संबंध है। इसका अर्थ यह नहीं कि जन्म के समय वास्तविक खगोलीय ग्रहण जरूर था।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • इस कुंडली में निर्धारित ग्रह-स्थिति इस जाँच का मूल नियम पूरा नहीं करती।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
गुरु चांडाल योग दोष नहीं

गुरु चांडाल योग

यह क्या है?

गुरु और राहु के विशेष संबंध को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। इसके प्रभाव को गुरु की शक्ति, भाव और दशा के साथ देखकर समझना चाहिए।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • इस कुंडली में निर्धारित ग्रह-स्थिति इस जाँच का मूल नियम पूरा नहीं करती।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
केमद्रुम योग दोष नहीं

केमद्रुम योग

यह क्या है?

केमद्रुम योग चंद्रमा की एक विशेष प्रकार की ग्रह-संगति की कमी से जुड़ा नियम है। इसके कई शमन नियम भी होते हैं, इसलिए केवल नाम देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • चंद्र से दूसरे भाव में कोई गिना गया ग्रह नहीं और बारहवें भाव में बुध, शुक्र है।

शमन / भंग के कारण

  • चंद्र लग्न से केंद्र में है, इसलिए केमद्रुम भंग होता है।
  • चंद्र से केंद्र में शास्त्रीय ग्रह मौजूद है, इसलिए केमद्रुम भंग होता है।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।
गण्डमूल दोष नहीं

गण्डमूल

यह क्या है?

गण्डमूल जन्म के समय चंद्रमा के कुछ विशेष नक्षत्रों में होने की पारंपरिक श्रेणी है। इसे भय या निश्चित अशुभ घटना की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

आपकी कुंडली में स्थिति

इस कुंडली में चुने गए नियमों के अनुसार यह दोष नहीं बन रहा है।

यह निष्कर्ष क्यों आया?

  • इस कुंडली में निर्धारित ग्रह-स्थिति इस जाँच का मूल नियम पूरा नहीं करती।

विस्तृत उपाय और सावधानियाँ

  1. यह दोष नहीं बन रहा, इसलिए कोई विशेष दोष-शांति आवश्यक नहीं है; सामान्य पूजा, सदाचार और संतुलित दिनचर्या पर्याप्त है।
महंगे या डर आधारित उपाय आवश्यक नहीं हैं; व्यावहारिक/चिकित्सकीय/कानूनी सलाह का स्थान ज्योतिष नहीं लेता।

शनि गोचर विश्लेषण

शनि साढ़ेसाती

शनि साढ़ेसाती चल रही है
वर्तमान चरण अंतिम चरण
जन्म चंद्र राशि कुंभ
वर्तमान शनि मीन 19°30′57″
वर्तमान चरण की अवधि 29 Mar 2025 03 Jun 2027
वर्तमान साढ़ेसाती अवधि 24 Jan 2020 03 Jun 2027
1 प्रथम चरण चंद्र से 12वीं राशि
2 मध्य चरण जन्म चंद्र राशि
3 अंतिम चरण चंद्र से दूसरी राशि
ज्योतिषीय संकेत

यह साढ़ेसाती का अंतिम चरण है। इसे पूर्व चरणों में आए परिवर्तनों को स्थिर करने, आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करने का समय माना जाता है।

पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय

पारंपरिक उपाय: शनिवार को शनि देव की उपासना करें, “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जप करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा सामर्थ्य अनुसार काले तिल, उड़द या जरूरतमंदों को दान करें।

विंशोत्तरी दशा

दशा

+ दशा को आसान भाषा में समझें विंशोत्तरी दशा, महादशा और अंतर्दशा का परिचय

वैदिक ज्योतिष में विंशोत्तरी दशा (जिसे अक्सर विशोंतरी दशा भी कहा जाता है) 120 वर्षों का ऐसा समय चक्र है, जो बताता है कि जीवन के किस चरण में किस ग्रह का प्रभाव अधिक रह सकता है।

महादशा किसी विशेष ग्रह के शासन का मुख्य लंबा दौर होता है, जो कई साल तक चलता है। उसके भीतर आने वाली अंतर्दशाएँ उसी दौर के छोटे और अधिक सटीक समय-खंड दिखाती हैं।

विंशोत्तरी दशा की मुख्य बातें

इन चार बातों से नीचे दी गई तालिका आसानी से समझी जा सकती है।

1

120 वर्ष का कुल चक्र

इस प्रणाली में 9 ग्रहों—केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध—को उनकी निश्चित अवधि दी गई है।

2

शुरुआत का आधार

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, व्यक्ति की पहली महादशा उसी नक्षत्र के स्वामी ग्रह से शुरू होती है।

3

महादशा — मुख्य काल

हर ग्रह की अवधि अलग होती है—जैसे शुक्र 20 वर्ष और सूर्य 6 वर्ष। यह उस समय के मुख्य जीवन-विषयों और बदलावों की पृष्ठभूमि बताती है।

4

अंतर्दशा — उप-काल

हर बड़ी महादशा के भीतर सभी 9 ग्रहों की छोटी अंतर्दशाएँ आती हैं, जो समय को और सटीक बनाती हैं।

बड़ा काल → उसके भीतर छोटा काल

दशा, महादशा और अंतर्दशा को ऐसे समझें

ये तीन अलग गणनाएँ नहीं हैं। विंशोत्तरी दशा पूरी समय-प्रणाली है, महादशा उसका मुख्य काल है और अंतर्दशा उसी मुख्य काल के भीतर छोटा उप-काल है।

1
पूरी प्रणाली

विंशोत्तरी दशा

9 ग्रहों का पूरा 120-वर्षीय समय चक्र। नीचे सभी महादशाएँ इसी क्रम में दिखाई गई हैं।

2
मुख्य काल

महादशा

एक ग्रह का लंबा काल, जिसकी अवधि 6 से 20 वर्ष होती है। अभी: शनि

3
उप-काल

अंतर्दशा

हर महादशा के भीतर आने वाला छोटा और अधिक सटीक समय-खंड। अभी: शनि

आपका व्यक्तिगत परिणाम

आपकी विंशोत्तरी दशा का परिणाम

नीचे दी गई दशाएँ आपके जन्म विवरण और जन्म नक्षत्र से गणना की गई हैं।

जन्म के समय पहली महादशा में शेष काल जन्म के बाद पहली महादशा में इतना समय शेष था।
मंगल — 0 वर्ष 6 माह 18 दिन
अभी चल रहा मुख्य और उप-काल महादशा मुख्य काल है; अंतर्दशा उसके भीतर का उप-काल है।
वर्तमान महादशा शनि 19 जुलाई 2024 से 20 जुलाई 2043
वर्तमान अंतर्दशा शनि 19 जुलाई 2024 से 23 जुलाई 2027

हर महादशा के भीतर अंतर्दशाएँ

+ तालिका का विवरण

हर कार्ड एक महादशा है। उसके भीतर उसी महादशा की 9 अंतर्दशाएँ दी गई हैं। “अगला काल आरंभ” अगली अंतर्दशा की तारीख है; अंतिम पंक्ति के बाद अगली महादशा शुरू होती है।

मंगल महादशा — 7 वर्ष

महादशा अवधि: 20 जुलाई 1983 19 जुलाई 1990

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र

राहु महादशा — 18 वर्ष

महादशा अवधि: 19 जुलाई 1990 19 जुलाई 2008

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल

बृहस्पति महादशा — 16 वर्ष

महादशा अवधि: 19 जुलाई 2008 19 जुलाई 2024

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु

शनि महादशा — 19 वर्ष

महादशा अवधि: 19 जुलाई 2024 20 जुलाई 2043

वर्तमान
अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
शनि वर्तमान
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति

बुध महादशा — 17 वर्ष

महादशा अवधि: 20 जुलाई 2043 19 जुलाई 2060

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि

केतु महादशा — 7 वर्ष

महादशा अवधि: 19 जुलाई 2060 20 जुलाई 2067

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
केतु
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध

शुक्र महादशा — 20 वर्ष

महादशा अवधि: 20 जुलाई 2067 20 जुलाई 2087

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
शुक्र
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु

सूर्य महादशा — 6 वर्ष

महादशा अवधि: 20 जुलाई 2087 19 जुलाई 2093

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
सूर्य
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु
शुक्र

चंद्र महादशा — 10 वर्ष

महादशा अवधि: 19 जुलाई 2093 21 जुलाई 2103

अंतर्दशा आरंभ अगला काल आरंभ
चंद्र
मंगल
राहु
बृहस्पति
शनि
बुध
केतु
शुक्र
सूर्य
विस्तृत कुंडली रिपोर्ट पूरा फलादेश देखें जीवन, स्वभाव, शिक्षा, करियर, विवाह, धन और अन्य विषय—क्लिक करके खोलें फलादेश खोलें
कुंडली विश्लेषण

विस्तृत फलादेश

भाव, ग्रह, कारक, योग-दोष और वर्तमान दशा को साथ देखकर तैयार विश्लेषण।
गहन पारंपरिक ज्योतिषीय विश्लेषण

पहले हर परिणाम सामान्य भाषा में समझाया गया है—क्या बन रहा है, क्यों बन रहा है और अभी उसका समय कितना सक्रिय है। तकनीकी ग्रह-स्थिति चाहें तो नीचे अलग से खोल सकते हैं।

जानकारी उपलब्ध नहीं

जन्म कुंडली और वर्तमान समय का व्यक्तिगत विश्लेषण

कुंडली सारांश

ⓘ स्कोर का अर्थ

यह 0–100 अंक ज्योतिषीय समर्थन का माप है, किसी घटना की संभावना या सफलता की गारंटी नहीं।

आपकी कुंडली एक नज़र में

गणना: 31 अगस्त 2026
लग्नकुंभ
चंद्र राशिकुंभ
जन्म नक्षत्रधनिष्ठा पद 4
वर्तमान दशाशनि / शनि / मंगल

आज की 3 सबसे महत्वपूर्ण बातें

सबसे मजबूत क्षेत्र
करियर58/100

मध्यम

अभी प्रमुख कार्य-दिशा
धन55/100

मध्यम

अधिक सजगता उपयोगी
विवाह44/100

मिश्रित / सावधानी

जीवन क्षेत्र विश्लेषण

जन्म क्षमता और वर्तमान समय का एक ही canonical परिणाम

करियर

आपकी अपेक्षाकृत मजबूत दिशा
58/100मध्यम
जन्म क्षमता
62
वर्तमान समय
49
गणना विश्वसनीयता
82%

मूल संकेत सीमित हैं; संतुलित निर्णय वर्तमान समय को व्यवस्थित रखने में सहायक होंगे। करियर में क्रमिक प्रगति के लिए काम को प्राथमिकता और समयबद्धता से आगे बढ़ाएँ।

सूत्र: (61.7 × 0.70) + (49.4 × 0.30) = 58

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 67.2 · 30%
  • भाव स्वामी: 71.28 · 20%
  • कारक ग्रह: 49.5 · 15%
  • संबंधित वर्ग: 53.5 · 20%
  • योग-दोष: 63.13 · 10%
  • सहायक भाव: 57.81 · 5%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 51.37 · 60%
  • गोचर: 46.47 · 40%

धन

संतुलित क्षेत्र
55/100मध्यम
जन्म क्षमता
57
वर्तमान समय
51
गणना विश्वसनीयता
85%

स्थिति संतुलित है; नियमित प्रयास से परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं। आय, बचत और खर्च में योजनाबद्ध निर्णय धन-संतुलन के लिए अधिक उपयोगी हैं।

सूत्र: (56.9 × 0.70) + (51.3 × 0.30) = 55.2

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 51.59 · 30%
  • भाव स्वामी: 47.56 · 20%
  • कारक ग्रह: 52.78 · 15%
  • संबंधित वर्ग: 76.5 · 20%
  • योग-दोष: 60.42 · 10%
  • सहायक भाव: 52.46 · 5%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 54.52 · 60%
  • गोचर: 46.47 · 40%

विवाह

अधिक सजगता उपयोगी
44/100मिश्रित / सावधानी
जन्म क्षमता
43
वर्तमान समय
47
गणना विश्वसनीयता
81%

इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक सजगता और योजनाबद्ध प्रयास उपयोगी रहेंगे। रिश्तों में स्पष्ट संवाद और अपेक्षाओं का संतुलन सहयोग बढ़ाता है।

सूत्र: (43 × 0.70) + (46.7 × 0.30) = 44.1

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 37.54 · 33.33%
  • भाव स्वामी: 51.27 · 22.22%
  • कारक ग्रह: 52.78 · 16.67%
  • संबंधित वर्ग: 32.96 · 22.22%
  • सहायक भाव: 53.87 · 5.56%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 48.85 · 60%
  • गोचर: 43.43 · 40%

शिक्षा

संतुलित क्षेत्र
53/100मध्यम
जन्म क्षमता
54
वर्तमान समय
50
गणना विश्वसनीयता
86%

मूल संकेत सीमित हैं; संतुलित निर्णय वर्तमान समय को व्यवस्थित रखने में सहायक होंगे। एकाग्र अभ्यास और नई जानकारी का व्यावहारिक उपयोग सीखने की दिशा को मजबूत करता है।

सूत्र: (54.2 × 0.70) + (49.7 × 0.30) = 52.8

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 46.14 · 30%
  • भाव स्वामी: 56.07 · 20%
  • कारक ग्रह: 50.85 · 15%
  • संबंधित वर्ग: 62.58 · 20%
  • योग-दोष: 63.13 · 10%
  • सहायक भाव: 52.8 · 5%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 53.89 · 60%
  • गोचर: 43.32 · 40%

स्वास्थ्य

संतुलित क्षेत्र
45/100मिश्रित / सावधानी
जन्म क्षमता
40
वर्तमान समय
56
गणना विश्वसनीयता
75%

मूल संकेत सीमित हैं; संतुलित निर्णय वर्तमान समय को व्यवस्थित रखने में सहायक होंगे। नियमित नींद, आहार और दिनचर्या स्वास्थ्य-सहायक संकेतों को बेहतर दिशा देते हैं।

स्वास्थ्य स्कोर केवल ज्योतिषीय health-support संकेत है; यह चिकित्सकीय निदान नहीं है।

सूत्र: (39.7 × 0.70) + (55.6 × 0.30) = 44.5

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 37.01 · 37.5%
  • भाव स्वामी: 47.73 · 25%
  • कारक ग्रह: 48.89 · 18.75%
  • योग-दोष: 12.5 · 12.5%
  • सहायक भाव: 51.09 · 6.25%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 62.71 · 60%
  • गोचर: 45.01 · 40%

भाग्य

संतुलित क्षेत्र
51/100मध्यम
जन्म क्षमता
53
वर्तमान समय
47
गणना विश्वसनीयता
85%

मूल संकेत सीमित हैं; संतुलित निर्णय वर्तमान समय को व्यवस्थित रखने में सहायक होंगे। तैयारी, सही समय और अनुभव से सीखना अवसरों का बेहतर उपयोग कराता है।

सूत्र: (52.6 × 0.70) + (46.6 × 0.30) = 50.8

जन्म संकेत
  • मुख्य भाव: 67.16 · 30%
  • भाव स्वामी: 58 · 20%
  • कारक ग्रह: 47.56 · 15%
  • संबंधित वर्ग: 27.75 · 20%
  • योग-दोष: 63.13 · 10%
  • सहायक भाव: 37.39 · 5%
वर्तमान संकेत
  • दशा: 52 · 60%
  • गोचर: 38.59 · 40%

आपकी जीवन-दिशाएँ

करियर
58
धन
55
शिक्षा
53
भाग्य
51
स्वास्थ्य
45
विवाह
44

आपकी कुंडली को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले ग्रह

मंगल71/100

साहसकार्य-ऊर्जासंवाद

मंगल आपकी कुंडली में साहस, कार्य-ऊर्जा और संवाद से जुड़े विषयों को प्रमुख बनाता है।

10वें भाव में · 3 और 10 भाव का स्वामी
केतु60/100

अंतर्दृष्टिअनुसंधानआत्मचिंतन

केतु आपकी कुंडली में अंतर्दृष्टि, अनुसंधान और आत्मचिंतन से जुड़े विषयों को प्रमुख बनाता है।

6वें भाव में
शुक्र58/100

संबंधसौंदर्यबोधसुविधा

शुक्र आपकी कुंडली में संबंध, सौंदर्यबोध और सुविधा से जुड़े विषयों को प्रमुख बनाता है।

12वें भाव में · 4 और 9 भाव का स्वामी

अभी कौन-सा समय चल रहा है?

वर्तमान दशा काल
महादशाशनि19 जुलाई 2024 से 20 जुलाई 2043
अंतर्दशाशनि19 जुलाई 2024 से 23 जुलाई 2027
प्रत्यंतर दशामंगल12 जुलाई 2026 से 14 सितम्बर 2026
वर्तमान दशा समर्थन50/100 · मध्यम

वर्तमान शनि महादशा, शनि अंतर्दशा और मंगल प्रत्यंतर में स्वास्थ्य को तुलनात्मक समर्थन मिल रहा है; भाग्य में संतुलित निर्णय उपयोगी रहेंगे।

वर्तमान ग्रह संकेत

गुरुध्यान योग्य

दिनचर्या और प्रतिस्पर्धा में धैर्य और अतिरिक्त सजगता उपयोगी रहेगी।

गुरु वर्तमान में जन्म कुंडली के 6वें भाव को सक्रिय कर रहा है। · कर्क
शनिध्यान योग्य

धन और पारिवारिक निर्णय में धैर्य और अतिरिक्त सजगता उपयोगी रहेगी।

शनि वर्तमान में जन्म कुंडली के 2वें भाव को सक्रिय कर रहा है। · मीन
राहुध्यान योग्य

स्वयं और आत्मविश्वास में धैर्य और अतिरिक्त सजगता उपयोगी रहेगी।

राहु वर्तमान में जन्म कुंडली के 1वें भाव को सक्रिय कर रहा है। · कुंभ
केतुध्यान योग्य

संबंध और साझेदारी में धैर्य और अतिरिक्त सजगता उपयोगी रहेगी।

केतु वर्तमान में जन्म कुंडली के 7वें भाव को सक्रिय कर रहा है। · सिंह

प्रमुख योग और दोष

सहायक योग

Kendra-Trikona Raja Yogaसहायक

प्रगति, अवसर और उपलब्धियों के संकेतों को समर्थन।

ध्यान देने वाले योग

पितृ दोष संकेतसक्रिय संकेत

इस संकेत को शमन कारकों और पूरी कुंडली के संदर्भ में संतुलित रूप से पढ़ना उपयोगी है।

पापकर्तरी योगसक्रिय संकेत

संबंधित विषयों में धैर्य और योजनाबद्ध प्रतिक्रिया से संतुलन बनता है।

आपकी प्रमुख ताकतें

कार्य क्षमता

निरंतर प्रयास से करियर को स्थिर दिशा देने की क्षमता प्रमुख है।

आर्थिक समझ

योजनाबद्ध निर्णय और संसाधनों को संतुलित रखने की प्रवृत्ति उपयोगी है।

सीखने की क्षमता

नई जानकारी समझने और उसका उपयोग करने की प्रवृत्ति प्रमुख है।

जिन क्षेत्रों में अधिक सजग रहें

संबंधों में संवाद

अपेक्षाओं और भावनाओं पर शांत, स्पष्ट संवाद बनाए रखें।

स्वास्थ्य एवं दिनचर्या

नींद, आहार और नियमित दिनचर्या के संतुलन पर ध्यान दें।

अवसरों में विवेक

भाग्य के भरोसे की बजाय तैयारी और समयबद्ध प्रयास को प्राथमिकता दें।

आपकी कुंडली का सार

आपकी अपेक्षाकृत मजबूत दिशाएँ करियर और धन हैं।

करियर और धन में क्रमशः मध्यम और मध्यम सहयोग है; स्थिर प्रयास और योजनाबद्ध निर्णय उपयोगी रहेंगे।

विवाह और संबंधों में संकेत मिश्रित / सावधानी स्तर के हैं, इसलिए स्पष्ट संवाद विशेष महत्त्व रखता है।

शिक्षा, स्वास्थ्य-सहायक संकेत और भाग्य क्रमशः मध्यम, मिश्रित / सावधानी और मध्यम स्थिति दिखाते हैं।

वर्तमान शनि महादशा, शनि अंतर्दशा और मंगल प्रत्यंतर में स्वास्थ्य को तुलनात्मक समर्थन मिल रहा है; भाग्य में संतुलित निर्णय उपयोगी रहेंगे।

वर्तमान ग्रह संकेत जल्दबाजी से बचकर संतुलित, योजनाबद्ध कदम रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

70% जन्म क्षमता + 30% वर्तमान समय समर्थन

60% दशा + 40% गोचर

अनुपलब्ध घटक को शून्य नहीं माना गया; उपलब्ध भार समानुपात में पुनर्गठित हुए।

60% उपलब्ध गणना कवरेज + 40% घटकों की आपसी सहमति

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