पर्व विशेष · परंपरा और पूजा मार्गदर्शिका
छठ पूजा
छठ सूर्य-उपासना का पर्व है, जिसमें संध्या और प्रातःकाल अर्घ्य दिया जाता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और प्रवासी समुदायों में इसकी विशेष परंपरा है।
- पारंपरिक तिथि / आधार
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी का प्रमुख पर्व
- उपासना और उत्सव
- सूर्य अर्घ्य और छठी मैया की उपासना
छठ पूजा की तिथि और पूजा-समय
संध्या और उषा अर्घ्य के लिए स्थानीय सूर्यास्त और सूर्योदय देखें।
पर्व की तिथि, पूजा की अवधि और व्रत के पारण का समय अलग हो सकते हैं। तारीख देखते समय वर्ष, शहर और अपनी पारिवारिक परंपरा साथ में देखें।
नीचे के लिंक संबंधित महीनों का पंचांग खोलते हैं। ये पूजा-मुहूर्त की घोषणा नहीं हैं; इस लेख में वर्ष और शहर के लिए अलग से सत्यापित मुहूर्त प्रकाशित नहीं किया गया है।
छठ पूजा का महत्व
छठ में सूर्य और छठी मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। स्वच्छता, संयम और सामुदायिक सहयोग इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। परिवार व्रती की तैयारी में मिलकर भाग लेता है।
नहाय-खाय, खरना, संध्या-अर्घ्य और उषा-अर्घ्य अलग चरण हैं। केवल षष्ठी की एक तारीख देखकर पूरे उत्सव का क्रम पूरा नहीं समझा जा सकता।
पूजा की सामग्री और तैयारी
- स्वच्छ सूप या दौरा
- परंपरा के अनुसार फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद
- अर्घ्य का जल-पात्र
- घाट तक सामग्री ले जाने की व्यवस्थित तैयारी
पूजा और उत्सव का क्रम
नहाय-खाय, खरना और अर्घ्य की तैयारी परिवार की परंपरा में की जाती है। घाट पर सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखें।
- चारों दिनों का क्रम परिवार के अनुभवी सदस्य से तय करें। घाट और स्थानीय व्यवस्था पहले जानें।
- नहाय-खाय और खरना की तैयारी स्वच्छता से करें। व्रती के विश्राम और सहायता की व्यवस्था रखें।
- षष्ठी के संध्या-अर्घ्य में स्थानीय सूर्यास्त का समय देखें और निर्धारित सुरक्षित घाट पर पहुँचें।
- अगले दिन उषा-अर्घ्य के लिए स्थानीय सूर्योदय देखें। पूजा के बाद परिवार की रीति से पारण और प्रसाद-वितरण करें।
क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र से यह परंपरा व्यापक हुई है। चैती छठ अलग ऋतु में आती है; यहाँ कार्तिक छठ का परिचय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ में डूबते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
दोनों अर्घ्य इस पर्व के परंपरागत क्रम के अंग हैं। उन्हें एक ही दिन की पूजा न समझें।
क्या जल में गहराई तक जाना जरूरी है?
नहीं। पूजा के लिए सुरक्षित स्थान और स्थानीय व्यवस्था का पालन करें।
परंपरा-संदर्भ: Drik Panchang पर छठ पूजा। ऊपर दिया पूजा-परिचय सामान्य मार्गदर्शन है; विशिष्ट अनुष्ठान अपनी परंपरा के अनुसार करें।