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दैनिक वैदिक पंचांग

4 सितंबर 1903 का पंचांग, शुक्रवार

दिन का पंचांग

हिन्दू पंचांग के अनुसार 4 सितंबर 1903, शुक्रवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। विक्रम संवत 1960 (नल संवत्सर) और शक संवत 1825 (शोभकृत संवत्सर) चल रहा है।

तिथि त्रयोदशी 5 सितंबर, 1:36 AM तक, इसके बाद चतुर्दशी अगले सूर्योदय तक जारी। नक्षत्र श्रावण 11:04 PM तक, इसके बाद धनिष्ठा अगले सूर्योदय तक जारी। योग शोभन 01:28 PM तक, इसके बाद अतिगण्ड अगले सूर्योदय तक जारी। करण कौलव 12:25 PM तक, इसके बाद तैतिल 5 सितंबर, 1:35 AM तक, इसके बाद गर अगले सूर्योदय तक जारी।

4 सितंबर 1903, शुक्रवार को राहु काल 10:47 AM–12:22 PM तक है। चन्द्रमा मकर राशि में संचार करेगा। सूर्योदय 06:04 AM और सूर्यास्त 06:40 PM है।

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शुक्रवार

पंचांग 04/09/1903 • September 4, 1903

भाद्रपद · शुक्ल पक्ष
सूर्योदय06:04 AM
सूर्यास्त06:40 PM
चन्द्रोदय03:36 AM
चन्द्रास्त04:54 PM
अयनदक्षिणायन
द्रिक ऋतुवर्षा
धर्म और परंपरा

4 सितंबर 1903 के व्रत और त्योहार

प्रदोष व्रत

इस दिन से जुड़ा पारंपरिक व्रत या उत्सव।

ओणम

केरल का प्रमुख फसल और सांस्कृतिक पर्व; पारिवारिक पूजा, पुष्प सज्जा और ओणम-सद्या की परंपरा जुड़ी है।

नोट: व्रत-त्योहार का पालन क्षेत्र, परंपरा और सूर्योदय-आधारित तिथि के अनुसार अलग हो सकता है।

हिन्दू कैलेंडर और राशि

विक्रम संवत 1960, शक संवत 1825, अमांत मास भाद्रपद, पूर्णिमांत मास भाद्रपद और सौर मास सिंह।

सूर्य राशि सिंह, चंद्र राशि मकर, अधिक मास नहीं।

शुभ और अशुभ समय

शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:56 AM–12:46 PM

ब्रह्म मुहूर्त04:32 AM–05:17 AM

निशीथ काल11:59 PM–12:44 AM

अशुभ काल

राहु काल10:47 AM–12:22 PM

यमगण्ड03:31 PM–05:05 PM

गुलिक काल07:38 AM–09:13 AM

आज के विशेष योग और संकेत

अमृत सिद्धि योग: नहीं · सर्वार्थ सिद्धि योग: हाँ · गुरु पुष्य योग: नहीं · रवि पुष्य योग: नहीं।

पंचक: नहीं · भद्रा: नहीं · दिशा शूल: पश्चिम।

दिन के पाँच काल

प्रातःकाल 06:03 AM–08:34 AMसंगव 08:34 AM–11:05 AMमध्याह्न 11:05 AM–01:37 PMअपराह्न 01:37 PM–04:08 PMसायाह्न 04:08 PM–06:39 PM

चौघड़िया

शुभ कार्य के लिए हरे और नीले चौघड़िया उपयोगी माने जाते हैं। लाल और काले समय में महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचें।

चौघड़िया आरंभ समाप्त
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
अति शुभ शुभ अशुभ वेला (अशुभ)

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4 सितंबर 1903 के पंचांग से जुड़े सवाल

4 सितंबर 1903 को कौन-सी तिथि है?

भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी 01:36 AM तक है, इसके बाद चतुर्दशी तिथि रहेगी।

4 सितंबर 1903 को राहु काल कब है?

Bhilwara, Rajasthan, India में राहु काल 10:47 AM से 12:22 PM तक है।

4 सितंबर 1903 के व्रत और त्योहार कौन-से हैं?

इस दिन प्रदोष व्रत, ओणम सूचीबद्ध हैं। स्थानीय परंपरा और स्थान के अनुसार पालन में अंतर हो सकता है।

पंचांग में स्थान क्यों जरूरी है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और मुहूर्त स्थान के अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। यह पंचांग Bhilwara, Rajasthan, India के लिए है।

ग्रह होरा के 24 काल देखें
शुक्र 06:03 AM–07:03 AMबुध 07:03 AM–08:03 AMचंद्र 08:03 AM–09:03 AMशनि 09:03 AM–10:03 AMगुरु 10:03 AM–11:03 AMमंगल 11:03 AM–12:03 PMसूर्य 12:03 PM–01:03 PMशुक्र 01:03 PM–02:03 PMबुध 02:03 PM–03:03 PMचंद्र 03:03 PM–04:03 PMशनि 04:03 PM–05:03 PMगुरु 05:03 PM–06:03 PMमंगल 06:03 PM–07:03 PMसूर्य 07:03 PM–08:03 PMशुक्र 08:03 PM–09:03 PMबुध 09:03 PM–10:03 PMचंद्र 10:03 PM–11:03 PMशनि 11:03 PM–12:03 AMगुरु 12:03 AM–01:03 AMमंगल 01:03 AM–02:03 AMसूर्य 02:03 AM–03:03 AMशुक्र 03:03 AM–04:03 AMबुध 04:03 AM–05:03 AMचंद्र 05:03 AM–06:03 AM
गणना संदर्भ

मध्याह्न 12:21 PM · निर्देशांक 25.470994, 74.696132 · Lahiri ayanamsha 22.507738°